भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2026 के करीब 64 अरब डॉलर से बढ़कर 2035 तक 200 अरब डॉलर पहुंच सकता है। EY और IESA के अनुसार, भारत अब केवल चिप निर्माण नहीं, बल्कि डिजाइन, पैकेजिंग, सामग्री, उपकरण, R&D और प्रतिभा का एकीकृत इकोसिस्टम विकसित कर रहा है।
भारत का सेमीकंडक्टर सेक्टर तेजी से नए दौर में प्रवेश कर रहा है। EY और India Electronics and Semiconductor Association (IESA) की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार 2021 के करीब 27 अरब डॉलर से बढ़कर 2026 में लगभग 64 अरब डॉलर हो गया। अब 2035 तक इसके 200 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। AI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मोबिलिटी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग से चिप्स की मांग बढ़ रही है। इसके साथ ही, वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव भारत के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है।
बाजार में तेज विस्तार
भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2021 में करीब 27 अरब डॉलर का था। 2026 तक इसका आकार लगभग 64 अरब डॉलर पहुंच गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2035 तक यह बाजार करीब 200 अरब डॉलर का हो सकता है। यह वृद्धि AI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मोबिलिटी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसी गतिविधियों से जुड़ी मांग से मिलेगी।
NITI Aayog की 2026 की रिपोर्ट भी भारत की सेमीकंडक्टर मांग को 2035 तक 200 अरब डॉलर से अधिक बताती है।
ISM 1.0 से मिली रफ्तार
भारत सरकार ने India Semiconductor Mission (ISM) के पहले चरण के लिए 76,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था।
इसके तहत 12 सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट मंजूर हुए हैं। इनमें एक सिलिकॉन फैब, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब और नौ पैकेजिंग सुविधाएं शामिल हैं।
इन परियोजनाओं में कुल निवेश करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये है। इसके अलावा, 23 चिप टेप-आउट भी पूरे किए गए हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार, 24 डिजाइन प्रोजेक्ट्स को समर्थन मिला है।
प्रमुख आंकड़े
2021: करीब 27 अरब डॉलर का बाजार
2026: करीब 64 अरब डॉलर
2035: करीब 200 अरब डॉलर का अनुमान
ISM 1.0: 76,000 करोड़ रुपये का आउटले
मंजूर प्रोजेक्ट: 12
कुल निवेश: करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये
चिप टेप-आउट: 23
Semicon 2.0 का नया फोकस
सरकार ने 2026 में Semicon 2.0 को आगे बढ़ाया है। इसके लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का स्वीकृत आउटले रखा गया है।
इस चरण में केवल फैब और पैकेजिंग पर ध्यान नहीं है। कार्यक्रम डिजाइन, सेमीकंडक्टर सामग्री और उपकरण, फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग, R&D और प्रतिभा विकास को भी कवर करता है।
EY के अनुसार, Semicon 2.0 में छह रणनीतिक स्तंभ और अलग-अलग वित्तीय सहायता तंत्र शामिल हैं।
इसके अलावा, सरकार का जोर सेमीकंडक्टर-ग्रेड सामग्री, स्पेशियलिटी केमिकल्स, गैस, सब्सट्रेट और उपकरणों की घरेलू क्षमता बढ़ाने पर है।
चिप डिजाइन में भारत मजबूत
भारत की सेमीकंडक्टर कहानी केवल मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है। देश के पास वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन टैलेंट का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा है।
DLI कार्यक्रम के तहत डिजाइन क्षमता को भी बढ़ाया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 105 कंपनियों को एडवांस्ड Electronic Design Automation यानी EDA टूल्स तक पहुंच मिली है।
NITI Aayog ने भी भारत की डिजाइन क्षमता को सेमीकंडक्टर रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत को एडवांस्ड पैकेजिंग और विशेष सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में अपनी क्षमता मजबूत करनी होगी।
आगे की राह और चुनौतियां
भारत के सामने अगली चुनौती नीति से वास्तविक इकोसिस्टम निर्माण तक पहुंचने की है। रिपोर्ट के अनुसार, execution, innovation, localisation और capability development आगे की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
भारत की सेमीकंडक्टर मांग बढ़ रही है, लेकिन आयात पर निर्भरता अभी भी बड़ी चुनौती है। NITI Aayog के मुताबिक, मौजूदा घरेलू मांग का करीब 90-95 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा होता है।
इसलिए आने वाले वर्षों में केवल फैब लगाने से लक्ष्य पूरा नहीं होगा। डिजाइन से लेकर सामग्री, उपकरण, पैकेजिंग, परीक्षण और R&D तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करना जरूरी होगा।


